त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड ने सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के मुद्दे पर अपना रुख पूरी तरह बदल दिया है। अध्यक्ष जयकुमार ने बताया कि 2019 का हलफनामा वापस लिया जाएगा और अब मंदिर की सदियों पुरानी रीतियों का बचाव किया जाएगा। यह घोषणा चुनावी माहौल में राजनीतिक हलचल मचा रही है।
पिछले चुनावों में इस मुद्दे पर वाम सरकार को नुकसान झेलना पड़ा था। विजयन सरकार ने महिलाओं को प्रवेश दिलाने की मुहिम चलाई, जिससे भक्तों में आक्रोश फैला। अब संभावित आंदोलनों को भनकते ही बोर्ड ने मोर्चा संभाला है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 14 मार्च तक जवाब दाखिल करने हैं। 7 अप्रैल से नौ जजों वाली बेंच प्रमुख सुनवाई करेगी। 67 याचिकाओं में धार्मिक स्वतंत्रता, आवश्यक प्रथाएं और न्यायिक हस्तक्षेप जैसे सवाल शामिल हैं।
केंद्र परंपरावादियों के साथ खड़ा है। केरल सरकार को अब अदालत और वोटबैंक के बीच संतुलन बनाना होगा। यह बदलाव आस्था की रक्षा और आधुनिकता के द्वंद्व को रेखांकित करता है।