4 मार्च को होली के रंग उड़ाने का समय है, लेकिन कर्नाटक के रामलिंगेश्वर कामन्ना मंदिर में राख ही मुख्य आकर्षण बनेगी। दक्षिण भारत में यह त्योहार शिव और कामदेव की कथा से जुड़ा है, जहां अहंकार का विनाश राख के रूप में साकार होता है।
यह मंदिर विशेष है क्योंकि यहां शिव और कामदेव एक ही गर्भगृह में हैं। होली पर दोनों दर्शन करने से पाप नष्ट होते हैं। ध्यानमग्न कामदेव प्रतिमा शिवलिंग के निकट विराजमान है। मंदिर में होली पर भक्तों का तांता लग जाता है।
कथा कहती है कि सती के बाद शिव की तपस्या से सृष्टि ठहर गई। कामदेव ने बाण चलाया, तपस्या भंग की। शिव के तीसरे नेत्र से कामदेव भस्म हो गए, उनके अहंकार का अंत हो गया।
होली के पांच दिनों में चांदी की वस्तुएं चढ़ाई जाती हैं। संतान प्राप्ति के लिए झूले अर्पित होते हैं, जो हमेशा फलदायी सिद्ध होते हैं। राख तिलक अहंकार नाश की याद दिलाता है।
यह अनूठी होली आध्यात्मिक जागरण का संदेश देती है। कर्नाटक का यह स्थल भक्तों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है।