प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 28 फरवरी को रात में चली सीसीएस बैठक ने पश्चिम एशिया की बिगड़ती स्थिति पर गहन मंथन किया। ईरान पर हुए हवाई हमले और खाड़ी क्षेत्र में फैलते तनाव ने वैश्विक चिंताएं बढ़ा दी हैं।
समिति को हमलों की पूरी ब्रिफिंग दी गई, जिसमें क्षेत्रीय उथल-पुथल का जायजा लिया गया। भारतीय प्रवासियों की भारी संख्या को देखते हुए उनकी सुरक्षा प्रमुख मुद्दा बनी। यात्रा करने वालों और छात्रों की दिक्कतों के साथ आर्थिक-व्यापारिक प्रभावों पर भी बात हुई।
निर्णय लिया गया कि सभी मंत्रालय प्रभावित भारतीयों की मदद के लिए सक्रिय हों—चाहे निकासी हो या अन्य सहायता। कूटनीति और संवाद से तनाव समाप्त करने की अपील की गई।
पीएम मोदी ने इजरायली समकक्ष नेतन्याहू से फोन पर हालात साझा किए, सुरक्षा और शत्रुता समाप्ति पर बल दिया। यूएई के शेख मोहम्मद बिन जायद से बात में संवेदना, समर्थन और भारतीयों की देखभाल पर चर्चा हुई।
भारत की यह रणनीति न केवल अपने लोगों की हिफाजत करती है बल्कि क्षेत्रीय शांति के लिए भी प्रयासरत है। आने वाले दिनों में और कदम उठाए जा सकते हैं।