रविवार को हैदराबाद में शिया समाज ने अमेरिका-इजरायल हमलों से अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या पर गमगीन होकर जोरदार विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। पुरानी हवेली और आसपास के इलाकों में उदासी का आलम छा गया, जहां काले कपड़ों में लिपटे लोग सड़कों पर उतर आए।
नूर खान बाजार, दारुलशिफा समेत क्षेत्रों में खामेनेई की तस्वीरें हाथों में लिए महिलाएं, बच्चे और पुरुषों ने हत्यारों के खिलाफ नारेबाजी की। शिया जगत के इस महान नेता की शहादत ने सभी को स्तब्ध कर दिया।
एक शिया प्रतिनिधि ने भीड़ से कहा कि खामेनेई जुल्मो-सितम के विरुद्ध अडिग रहे, जिसकी सजा उन्हें शहादत के रूप में मिली। मुस्लिम एकता की कमी को वे इस हादसे की जड़ मानते हैं और सबको जोड़ने का संदेश दिया।
शिया संगठन तंजीम-ए-जाफरी द्वारा बुलाई गई यह रैली पुरानी हवेली के मजहर-ए-इब्ने-खातून से प्रारंभ हुई। इसमें उमड़ी भीड़ ने शोकाकुल दृश्य प्रस्तुत किए, जहां कई लोग फूट-फूटकर रोए।
पुलिस ने पुराने शहर में भारी सुरक्षा व्यवस्था की ताकि शांति बनी रहे। ईरान कॉन्सुलेट में ध्वज आधा लहराकर सर्वोच्च नेता को श्रद्धांजलि दी गई।
ईरानी रिपोर्ट्स बताती हैं कि शनिवार के संयुक्त हमले में खामेनेई सहित उनके परिजन- बेटी, पोता, दामाद, बहू शहीद हुए। रक्षा प्रमुख आमिर नसीरजादेह व आईआरजीसी कमांडर मोहम्मद पाकपुर भी कुर्बान हो गए।
हैदराबाद का यह आंदोलन शिया समुदाय की संवेदनशीलता को उजागर करता है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह घटना विवादों को जन्म देगी, जिसका असर भारत तक महसूस होगा।