अमेरिका और इजरायल के साझा हवाई हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की शहादत पर भारत के राजनीतिक दलों ने एकजुट होकर शोक और रोष व्यक्त किया। रविवार को नई दिल्ली सहित देशभर से प्रतिक्रियाएं आईं, जहां नेताओं ने मध्य पूर्वी संकट को वैश्विक खतरे की संज्ञा दी।
भाजपा के तेलंगाना अल्पसंख्यक मोर्चा प्रवक्ता मीर फिरासत अली बाकरी ने ईरानी संस्कृति कार्यालय जाकर सभी शहीदों को श्रद्धा दी। ‘खामेनेई पर यह कुटिल हमला अस्वीकार्य है। यह मुस्लिम जगत और भारत दोनों के लिए गहरा आघात है, जिसकी भरपाई नहीं हो सकती।’
दिल्ली आप प्रमुख सौरभ भारद्वाज ने अंतरराष्ट्रीय मंचों की नाकामी पर प्रहार किया। ‘यूएन और सुरक्षा परिषद के ढहने से जंग ही एकमात्र रास्ता बचता है। दक्षिणपंथी ताकतों के उदय ने संस्थागत ढांचे को चूर कर दिया है।’
कर्नाटक गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने चेतावनी दी, ‘दूसरे विश्व युद्ध के बाद ऐसी जंग नहीं झकी। नेताओं पर हमले बंद हों, अन्यथा इंसानियत दांव पर लगेगी।’
खामेनेई का निधन ईरान के लंबे शासन की नींव हिला सकता है। बदले की आग में क्षेत्र जल रहा है, जिससे बड़े युद्ध का भय व्याप्त है। वैश्विक शक्तियां अब डिप्लोमेसी पर जोर दे रही हैं।