रुद्रप्रयाग में ग्रामीण महिलाओं ने केमिकल रहित होली रंग बनाने का बीड़ा उठाया है। जवाड़ी, कुमोली, मायकोटि, मेदनपुर व ऊखीमठ गांवों की स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं प्राकृतिक हर्बल रंग तैयार कर जिला बाजारों, विकास भवन और मुख्यालय तक पहुंचा रही हैं।
रासायनिक रंगों से त्वचा को होने वाले नुकसान से बचने के लिए यह कदम सराहनीय है। संगीता कप्रवाण ने बताया, ’25 रुपये वाले हमारे पैकेट में शुद्ध प्राकृतिक सामग्री है, कोई साइड इफेक्ट नहीं।’ मोनिका कप्रवाण ने जोड़ा कि घर के फूल-पत्तों से बने ये रंग बाजार में छाए हुए हैं।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन व ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के ट्रेनिंग से महिलाएं पालक का हरा, हल्दी का पीला, चुकंदर का लाल-गुलाबी तथा गेंदा का नारंगी रंग बना रही हैं। प्रशिक्षक भूपेंद्र रावत ने कहा, ‘पिछले प्रशिक्षणों का फल मिला है, त्योहारों पर स्टॉलों से भारी बिक्री हो रही।’
निदेशक अनूप कुमार ने कहा कि संस्थान विविध स्वरोजगार प्रशिक्षण देता है, जिसमें होली जैसे अवसरों के उत्पाद प्रमुख हैं। यह मुहिम महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए रासायनिक रंगों का बहिष्कार करने का संदेश दे रही। आगामी होली पर सभी से अपील है कि हर्बल रंग अपनाएं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करें।