मुर्शिदाबाद का बहरामपुर शहर इतिहास के पन्नों में सिपाही विद्रोह के लिए अमर है और वर्तमान में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटा है। यह जिले का मुख्यालय और राज्य की पुरानी नगर पालिकाओं में आठवां स्थान रखता है।
1757 में प्लासी के बाद ब्रिटिशों ने इसे छावनी बनाया, जो 1870 तक रही। नगर पालिका 1876 में बनी। 1857 की पहली बड़ी लड़ाई बैरक स्क्वायर में लड़ी गई, जो 1767 में बनी और आर्चीबाल्ड कैंपबेल का डिजाइन थी। 40 एकड़ का यह क्षेत्र अब खेल मैदान है, जहां ब्रिटिश अफसरों के बंगले थे।
सीट का नाम 2011 में परिसीमन से बहरामपुर हुआ, जिसमें नगर क्षेत्र और पांच पंचायतें हैं। 1951 से 14 चुनाव: कांग्रेस 8, आरएसपी 3, सीपीआई 2, 2006 में चक्रवर्ती (निर्दलीय), फिर कांग्रेस से जीत, 2021 में भाजपा की सुब्रत मैत्रा।
उद्योगों में रेशम, चावल मिल, तेल बीज और ‘खगराई कंशा’ धातु प्रमुख। ‘चनोबोरा’ मिठाई का स्वाद अनोखा। कोलकाता से 186 किमी दूर, कंडी (30), जियागंज (12), लालबाग (10) निकट हैं।
बहरामपुर का मैदान अब वोटों की जंग के लिए तैयार, जहां अतीत की गूंज भविष्य तय करेगी।