बिहार विधानसभा के बजट सत्र के आखिरी पल सत्तारूढ़ दल के 18 विधायकों ने धर्म परिवर्तन रोकने वाले कानून की मांग को तेज कर दिया। जनक सिंह, जीवेश कुमार, तार किशोर प्रसाद सहित नामचीन चेहरों ने ध्यानाकर्षण के जरिए मुद्दा उठाया।
दूसरे राज्यों के मॉडल का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि धोखाधड़ी, प्रलोभन या बाल विवाह से होने वाले धर्मांतरण पर कड़ी कार्रवाई के प्रावधान हैं। बिहार के बॉर्डर इलाकों में बड़े स्तर पर हो रहे बदलाव, बक्सर के 1000 दलित परिवारों का केस और चर्च निर्माण के आंकड़े पेश किए गए।
मिथिलेश तिवारी ने जोर देकर कहा कि यूपी जैसा कानून बिहार में जरूरी है। आरक्षण लाभ के नाम पर लालच देने के आरोप लगे। मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने स्पष्ट किया कि कोई योजना नहीं। अध्यक्ष प्रेम कुमार ने प्रस्ताव मान लिया, पर बहस रोकी।
यह कदम बिहार की राजनीति में धर्मांतरण विवाद को नया मोड़ दे सकता है, जहां सामाजिक संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है।