लखनऊ में राजनीतिक तापमान बढ़ गया जब प्रदेश मंत्री संजय निषाद ने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के लंबे दौर में अखिलेश ने जनहित में कोई प्रयास नहीं किया। ‘यदि किया होता तो प्रदेश की तस्वीर बदल चुकी होती,’ उन्होंने कहा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में निषाद ने कहा कि हमारी सरकार निवेशकों को आमंत्रित कर रही है, विपक्ष को तकलीफ क्यों? सपा को अपने कार्यकाल के आंकड़े पेश करने चाहिए। निवेश कितना लाए, विकास कैसे तेज किया—उनके पास कोई जवाब नहीं। अब हम जनता के लिए काम कर रहे हैं तो हाय-हाय मचा रहे हैं।
हम सर्वश्रेष्ठ प्रदेश बनाने को प्रतिबद्ध हैं। सीएम के वादों को पूरा करना हमारा ध्येय है, कोई ढिलाई नहीं चलेगी। अन्य मुद्दों पर संतुलित रुख अपनाया—अविमुक्तेश्वरानंद को न्याय का हक, मौर्य के वीजा पर भारत की ताकत जरूरी, उमाशंकर केस में जांच और मानवता का संतुलन।
विपक्ष को निषाद ने खरी-खरी सुनाई। जनता ने उन्हें नेस्तनाबूद कर दिया। जीवित रहने को बेतरह बयानबाजी, जो राजनीति में अस्वीकार्य है। जनता से कटे रहेंगे तो कौन पूछेगा? ऐसी बकवास पर ध्यान न दें।
यह टकराव यूपी की राजनीति में विकास बनाम नकारात्मकता की लड़ाई को उजागर करता है।