मुंबई/नई दिल्ली। कर्ज घपलों के खिलाफ सीबीआई की मुहिम तेज हो गई है। अनिल अंबानी के आवास और रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के दफ्तरों पर एजेंसी ने व्यापक तलाशी अभियान चलाया। कार्रवाई का आधार बैंक ऑफ बड़ौदा की शिकायत है, जिसमें आरकॉम पर 2220 करोड़ से अधिक का चूना लगाने का आरोप है।
एफआईआर में साजिश रचने, जालसाजी और भ्रष्टाचार के प्रावधानों का सहारा लिया गया। प्रमोटर अनिल अंबानी और अन्य पर कर्ज को संबद्ध कंपनियों में गलत तरीके से भेजने का इल्जाम है। बैंक अधिकारियों ने खातों में फर्जीवाड़ा पकड़ा, जो लंबे समय तक छिपा रहा।
2017 में एनपीए बने इस खाते को फ्रॉड घोषित करने पर अदालत ने रोक लगाई थी, जो हाल ही में हटी। छापेमारी में दस्तावेज बरामद हुए, जो जांच को मजबूत करेंगे। एसबीआई कंसोर्टियम केस से अलग, यह बोब का स्वतंत्र लोन है, जिसमें विजया व देना बैंक भी शामिल थे।
रिलायंस कम्युनिकेशंस का यह नया संकट टेलीकॉम क्षेत्र के लिए चेतावनी है। सीबीआई की जांच से कॉर्पोरेट धोखाधड़ी पर नकेल कसी जा सकती है। अनिल अंबानी के खिलाफ बढ़ते केस उनके बिजनेस एम्पायर को हिला सकते हैं। पूरी तफ्तीश के नतीजे आने बाकी हैं।