कर्नाटक में गारंटी योजनाओं को लेकर उठे विवाद पर उद्योग मंत्री एमबी पाटिल ने कहा कि ये विकास की कुंजी हैं, न कि आर्थिक भार। डीके शिवकुमार के बयान पर पलटवार करते हुए उन्होंने धनी लोगों से अपील की कि ये गरीबों के लिए हैं।
‘60,000 करोड़ का निवेश हमारा संकल्प है, जो बिना बोझ के पूरा हो रहा है,’ पाटिल ने जोर देकर कहा। सीएम सिद्धरमैया की कुशलता से इन योजनाओं ने व्यापक लाभ पहुंचाया है।
परमेश्वर ने टिप्पणी की, ‘शिवकुमार की बात घोषणापत्र की सामूहिक प्रक्रिया से उपजी है। शायद उन्हें गहन आंकड़े पता हों।’ योजनाओं में अमीरों की घुसपैठ पर उन्होंने स्वीकारा कि 100 एकड़ वाले भी पैसे ले रहे हैं, क्योंकि शुरू में कोई जांच नहीं थी।
मोदी जी के सब्सिडी त्याग अपील का हवाला देकर उन्होंने सीएम के संदेश को दोहराया। हीमोफीलिया रोगियों की ‘कुसुमा संजीवनी’ योजना में शिवकुमार ने बोझ माना, लेकिन कहा कि मानसिक शांति सुनिश्चित करनी है।
भाजपा की आलोचना के दौर में यह बहस कर्नाटक की वेलफेयर राजनीति को परिभाषित कर रही है। सरकार का दावा है कि ये योजनाएं समावेशी विकास लाएंगी।