चैत्र नवरात्रि की तैयारी जोरों पर है। मां भगवती के नौ रूपों की पूजा में डूबेगा देश। लेकिन भैरवगढ़ के जंगलों में विराजमान मसान मेलडी माता गुजरात की तांत्रिक संरक्षक हैं, जिनका मंदिर रहस्यों से भरा है।
मंदिर तक का सफर डरावना है—लंबे बांस के जंगल, पेड़ों पर ठोकी कीलें, टंगे नींबू व गुड़ियां। रात में अघोरियों की साधना यहां गूंजती है। टीन शेड वाला छोटा मंदिर मां की पादुका व मूर्ति समेटे है।
भक्त इत्र-तेल अर्पित कर मनोकामनाएं मांगते हैं। सूरज डूबते ही मंदिर बंद, तांत्रिकों के लिए खुला। मां ने पार्वती द्वारा उत्पन्न हो असुर अमरुव का वध किया, जो गाय के कंकाल में छिपा था।
गुजरात ग्रामीण आज भी इन्हें पूजते हैं। यह जंगल का तंत्र केंद्र भारत की आध्यात्मिक विविधता दर्शाता है, जहां भक्ति और रहस्य का मेल है।