गुजरात के नवसारी में योगेश यादव की बांस आधारित स्टार्टअप ने तहलका मचा दिया है। विश्वविद्यालय की ट्रेनिंग के दम पर इस आदिवासी युवा ने 120 विविध उत्पाद तैयार कर प्लास्टिक के खिलाफ जंग छेड़ी है। सभी सामान बायोडिग्रेडेबल और प्रकृति अनुकूल हैं।
उनकी प्रेरणा तीसरे साल के ईएलपी कोर्स से मिली, जहां बांस पर रिसर्च ने व्यावसायिक अवसर दिखाए। राज्य सरकार की स्टूडेंट स्टार्टअप एंड इनोवेशन पॉलिसी से फंडिंग पाकर उन्होंने उद्यम खोला। यह आदिवासी कला को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है।
‘प्लास्टिक को बांस से बदलें, पर्यावरण बचाएं’ – योगेश का संदेश साफ है। उनके उत्पाद घरेलू उपयोग के लिए परफेक्ट हैं और टिकाऊपन की गारंटी देते हैं। स्टार्टअप न केवल मुनाफा दे रहा, बल्कि जागरूकता भी फैला रहा है।
पीएम मोदी के आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने वाली यह कहानी युवाओं को प्रोत्साहित कर रही है। विकसित गुजरात के लक्ष्य में योगेश जैसे इनोवेटर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
बढ़ते बाजार के साथ उनका कारोबार विस्तार कर रहा है, जिससे स्थानीय रोजगार बढ़ेगा। यह पहल सस्टेनेबल डेवलपमेंट की नई दिशा तय कर रही है।