कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने बुधवार को बेंगलुरु में प्रेस से मुखातिब होकर सीएम पद विवाद पर बात की। समर्थकों की मांग को स्वीकारते हुए उन्होंने हाईकमान को सर्वोच्च अधिकार दिया।
उन्होंने कहा कि चयन या बदलाव जैसे फैसले पार्टी की परंपरा के मुताबिक होते हैं। सीएलपी बैठक और हाईकमान की चर्चा निर्णायक होगी। नाम आगे बढ़ाना ठीक, लेकिन इससे कुछ नहीं बदलेगा। अनुशासनहीनता का आरोप लगाने वालों को जवाब देते हुए बोले- ‘मैं सिपाही हूं, हुकुम मानूंगा।’
अपनी पेशकश पर गर्व जताया- पीसीसी अध्यक्ष के तौर पर पार्टी को दो चुनाव जितवाए, डिप्टी सीएम की कुर्सी संभाली। क्षमता पर सवाल बेमानी है। जारकीहोली या राजन्ना से बातचीत की कोई जानकारी नहीं।
दिल्ली यात्रा पर कहा, जरूरत पड़ी तो जाऊंगा। शिक्षा संस्थान चलाने का अनुभव है, आधिकारिक काम पर घोषणा करेंगे। गांधी परिवार या खड़गे से मिलना हो तो उनकी सुविधा देखेंगे।
राज्य में कांग्रेस की आंतरिक कलह को शांत करने की कोशिश में परमेश्वर ने संयम बरता। नेतृत्व का इंतजार कर रही पार्टी कार्यकर्ता हाईकमान के कदम पर निगाहें गड़ाए हैं।