रचित रोझा ‘द 50’ से बाहर, लेकिन छाप गहरी। उनका साहसिक स्टाइल ने दर्शकों को बांधे रखा, कड़ी टक्कर में लंबा संघर्ष किया।
इंटरव्यू में हरियाणा बैकग्राउंड की ताकत बताई। ‘नया शो, फैंस की मांग—सही मौका लगा।’
सेट पर मजाक, ‘थर्माकोल महल, बाद रिसाइकल करेंगे।’ प्लान—पूर्ण ऊर्जा हर चुनौती में।
सफर में जड़ें काम आईं, ‘मांसपेशी ही ताकत नहीं, बचपन की सादगी ने बेहतर प्रदर्शन कराया।’
भीड़ में अलग दिखना सहज, ‘कड़ी मेहनत और सच्चाई से पहचान बनी। यहीं लागू किया।’
रणनीति में वास्तविकता, ‘ईमानदार रहो, दर्शक दिल देखते हैं।’
गद्दारी के इल्जाम पर पलटवार, ‘वादा तोड़ना मेरा धंधा नहीं। काम से जजमेंट।’
करण बहस पर, ‘फोकस टास्क, लेकिन इज्जत की रक्षा जरूरी। सीधा मुकाबला मेरा स्टाइल।’ रचित की कहानी प्रेरणा बनेगी।