चंडीगढ़ शाखा में धोखाधड़ी के आरोपों के बीच आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने हरियाणा सरकार को 583 करोड़ रुपये की पूरी राशि—मूलधन व ब्याज सहित—भुगतान कर दी। मंगलवार के बयान में बैंक ने इसे ग्राहकों के प्रति पारदर्शिता और भरोसे का प्रमाण बताया।
शुरुआती तफ्तीश में सामने आया कि शाखा स्टाफ ने बाहरी तत्वों से सांठ-गांठ कर जाली दस्तावेजों को मंजूरी दी, जिसका खामियाजा सरकारी विभागों को भुगतना पड़ा। जांच एजेंसियां और अधिकारी अभी भी मामले की गुत्थी सुलझा रहे हैं, बैंक ने सभी जिम्मेदारों पर सख्ती का आश्वासन दिया।
प्रक्रिया चलते हुए भी बैंक ने राज्य के सभी दावों का शत-प्रतिशत समाधान कर दिया। भविष्य में कोई अतिरिक्त दावा हो तो राशि में बदलाव हो सकता है, लेकिन फिलहाल सब निपट गया। सरकार ने बैंक के फौरी कदम और जिम्मेदार रवैये की भूरि-भूरि प्रशंसा की, इसे क्षेत्र के लिए मिसाल कायम करने वाला बताया।
वित्तीय स्थिति बयानबाजी से इतर मजबूत साबित हुई। 2025 के अंत तक पूंजी पर्याप्त, सीआरआईएसआईएल से फिक्स्ड डिपॉजिट पर ट्रिपल ए, अन्य एजेंसियों से डबल ए प्लस रेटिंग। लोन-जमा कारोबार 5,62,090 करोड़ पर पहुंचा, 22.6% की छलांग के साथ। यह घटनाक्रम बैंक की दृढ़ता को रेखांकित करता है।