राजद के मनोज झा ने एनसीईआरटी कक्षा 8 की किताब के नए बदलावों—न्यायपालिका में भ्रष्टाचार उल्लेख और विभाजन विवरण—पर जोर दिया कि इतिहास समय के आईने में देखा जाए।
आईएएनएस को दिए बयान में उन्होंने स्पष्ट किया कि महात्मा गांधी व नेता विभाजन न चाहते थे, किंतु हिंसा की चरम स्थिति ने बाध्य किया। वर्तमान से भाषण देना आसान, किंतु कांग्रेस के नेतृत्व वाले स्वाधीनता आंदोलन की वास्तविकता समझनी होगी।
किताब में अब उल्लेख है कि विरोध के बावजूद गांधी-कांग्रेस ने इसे एकमात्र विकल्प माना।
झा ने यूथ कांग्रेस प्रमुख उदय भानु चिब की गिरफ्तारी और मास्टरमाइंड करार पर आपत्ति जताई। प्रदर्शन लोकतांत्रिक है। लाल किला, पुलवामा आदि में मास्टरमाइंड नहीं मिले, फिर यहां क्यों? सरकार पुनर्विचार करे।
बिहार के नॉनवेज प्रतिबंध को झा ने विजय सिन्हा की गिरिराज मॉडल राजनीति बताया। देश की सांस्कृतिक विविधता को समझें। गांव में मंदिर-स्कूल साथ हैं, बलि प्रथा है। सनसनीखेज मुद्दे उछालने से बेहतर वैकल्पिक दृष्टिकोण अपनाएं।
झा की यह पुकार शिक्षा व शासन में संतुलन की है।