उत्तर प्रदेश में शांति और विकास की नई इबारत लिखी जा रही है, लेकिन यह समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव को नागवार गुजर रही है। कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर ने इसे साफ शब्दों में बयान किया कि नौ बरसों से दंगों का साया प्रदेश से दूर है।
लखनऊ में बातचीत के दौरान राजभर ने योगी सरकार की उपलब्धियों का जिक्र किया। मेट्रो का जाल बिछ रहा है, एक्सप्रेसवे परियोजनाएं पूरी हो रही हैं और अपराध पर अंकुश लगा है। सीएम योगी ने कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त किया है, जिससे विकास को पंख लगे हैं।
अखिलेश को डर सताने लगा है कि चुनाव में उनका वोटबैंक टूट जाएगा। जातिगत समर्थन तो रहेगा, लेकिन मुसलमान मतदाता भाजपा की योजनाओं की ओर आकर्षित हो रहे हैं। मोदी-योगी की जोड़ी पिछड़ों और दलितों को सशक्त बना रही है।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मुद्दे पर अखिलेश की आलोचना का जवाब देते हुए राजभर ने 1990 का जिक्र किया, जब सपा के लोग स्वामी से दुश्मनी दिखा चुके थे। उन्होंने अखिलेश से कहा कि पुरानी घटनाओं को न भूलें।
अखिलेश ने भाजपा पर संतों का अपमान और आलोचकों को दबाने का आरोप लगाया। राजभर ने इसे खारिज करते हुए कहा कि यूपी अब पुराने दंगों वाली यादों से उबर चुका है। भाजपा की प्रगति विपक्ष की नींद उड़ा रही है।