असम की सियासत में विपक्षी एकजुटता पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं। क्षेत्रीय दलों राइजर दल और एजेपी ने गुवाहाटी में गोपनीय बैठक बुलाई, जिसमें कांग्रेस को शामिल नहीं किया गया। चर्चा का केंद्र सीटों का बंटवारा और रणनीति रहा।
राइजर दल विधायक अखिल गोगोई, एजेपी प्रमुख लुरिनज्योति गोगोई सहित वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टियां भी शरीक हुईं। भूपेन बोरा के इस्तीफे से कांग्रेस में मची उथल-पुथल के बीच यह कदम विपक्षी मोर्चे के लिए झटका है।
बैठक समाप्ति पर गोगोई ने कांग्रेस को 48 घंटे का समय दिया। ‘एकता चाहते हैं तो जल्द स्थिति साफ करें, वरना हम अकेले 46 सीटें लड़ेंगे।’ उन्होंने कहा। फिर भी, आगे बातचीत की गुंजाइश बरकरार है।
विश्लेषकों के मुताबिक, यह कदम कांग्रेस नेतृत्व पर बढ़ते अविश्वास को दर्शाता है। सत्ताधारी भाजपा तैयारियों में लगी है, विपक्ष की यह दरार उनके हित में जा सकती है। असम का भविष्य अब इन निर्णायक दिनों पर टिका है।