पश्चिम बंगाल की सियासत में हलचल तेज है। 2026 चुनाव से पहले संदेशखाली विधानसभा क्षेत्र सुर्खियों में है। नॉर्थ 24 परगना का यह एसटी आरक्षित इलाका सुंदरबन की गोद में बसा है, जहां भौगोलिक चुनौतियां और राजनीतिक उथल-पुथल साथ-साथ चलती हैं।
नदियों-खाड़ियों से ढका क्षेत्र मछली और धान की खेती से गुजारा करता है। तटबंध फटना और खारापन स्थानीयों की परेशानी है। दो ब्लॉकों की सात पंचायतों में ढाई लाख ग्रामीण वोटर हैं—एससी बहुल, एसटी व मुस्लिम महत्वपूर्ण। मतदान हमेशा उत्साहपूर्ण रहता है।
माकपा ने दशकों तक कब्जा जमाए रखा, 10 बार जीती। कांग्रेस को भी सफलता मिली। तृणमूल ने 2016 से दबदबा बनाया, लेकिन भाजपा तेजी से आगे बढ़ी—2021 में दूसरे नंबर पर और लोकसभा में लीड।
फरवरी 2024 की घटना ने माहौल बदल दिया। प्रवर्तन निदेशालय की जांच में तृणमूल नेताओं पर भ्रष्टाचार, यौन शोषण व अपराध के आरोप लगे। हिंसा भड़की, महिलाओं ने सड़कों पर उतरकर न्याय मांगा। सत्ताधारी दल की साख डगमगा गई।
गुटबाजी में भाजपा मजबूत दिख रही है। एससी-एसटी समुदायों में उसकी पैठ बढ़ रही। तृणमूल बचाव में है, जबकि वाम मोर्चा पीछे छूटा। यह सीट तय करेगी कि हिंसा का बदला वोट से लिया जाएगा या नहीं।