उत्तर प्रदेश बजट सत्र में सपा के हंगामेबाजी पर मंत्री संजय निषाद भड़क उठे। विधायकों द्वारा भाषण के कागज छीनने पर निषाद पार्टी प्रमुख ने कहा, ‘अपनों ने ठगा, पराए कहां से लाएं, वहीं डूबी नाव जहां गहराई न रही।’
मीडिया से बातचीत में उन्होंने सपा के लंबे राज को चोरों का बाजार बताया। सच्चर रिपोर्ट ने इनकी करतूतें बेनकाब कीं। पीडीए का नारा देकर पीड़ा, दुखी और अपमान बांटते हैं ये लोग। निषादों की पुकार दबाते हैं। बताएं, 30 वर्षों में एक पैसा दिया? केंद्र के फंड हड़प लिए। बंदूक दिखाकर वसूली की।
हमारे नेताओं को मार डाला, सीबीआई क्यों न बुलाई? आजम खां के भैंसे की तलाश हुई, हमारे शहीदों के हत्यारों की क्यों नहीं? रिपोर्ट्स में दूधवाले 27, चमड़े वाले 23, अन्य गायब। मछलियों के शिकारी खुद शिकार कर रहे। एससी सूची में नाम है, ओबीसी में क्यों धकेला?
चतुराई से फिल्म नाम रख विवाद खड़ा करते हैं। पहले नाम तय हो, फिर फिल्म बने, कानून बने। मदनी के कयामत वाले बयान पर- इन नेताओं ने मुसलमान भाइयों को बेरोजगार जाहिल बनाया। स्वामी जी को धार्मिक कार्य ही करें।
यह बयानबाजी यूपी में सियासी समीकरण बदलने का संकेत दे रही है। निषाद समाज मजबूत आवाज बन रहा है।