सुप्रीम कोर्ट ने सीएए के खिलाफ दायर याचिकाओं को लंबे इंतजार के बाद नई दिशा दी है। अदालत ने 5 मई 2026 से सुनवाई आरंभ करने की घोषणा की, जिसमें देश के अन्य मामलों को असम-त्रिपुरा के केसों से पहले रखा गया है। कुल 237 याचिकाएं लंबित हैं, जो इस विवादास्पद कानून की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाती हैं।
सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि स्पष्ट तारीख तय करना आवश्यक है। याचिकाकर्ताओं को दलीलें रखने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा और जरूरी दस्तावेज जमा करने की अनुमति होगी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पुराने आदेश का जिक्र कर मामलों को वर्गीकृत करने का आग्रह किया, जिस पर कोर्ट ने सहमति जताई।
यह कानून गैर-मुस्लिम प्रवासियों को पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफगानिस्तान से भारत में शरण मिलने पर नागरिकता का रास्ता खोलता है। विरोधियों का तर्क है कि मुस्लिमों को बाहर रखना भेदभावपूर्ण है। 2024 में नियम अधिसूचित होने से विवाद फिर भड़का। 2019 में कानून बनते ही बड़े आंदोलन हुए थे।
यह सुनवाई भारत की नागरिकता व्यवस्था और समानता के सिद्धांतों पर केंद्रित होगी। फैसला आने तक बहसें तेज रहेंगी। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय लाखों लोगों के भविष्य को आकार देगा और राजनीतिक माहौल को प्रभावित करेगा। न्याय की इस प्रक्रिया से लोकतंत्र की मजबूती का पता चलेगा।