नई दिल्ली से बड़ी खबर! गगनयान कार्यक्रम में ड्रोग पैराशूट का लोड टेस्ट सफल रहा। डीआरडीओ की टीम ने टीबीआरएल चंडीगढ़ की विशेष सुविधा पर इसे कठिन परिस्थितियों में परखा और यह पूरी तरह खरा उतरा।
अंतरिक्ष से लौटते कैप्सूल के लिए यह पैराशूट जीवनरक्षक है। यह गति नियंत्रित कर कैप्सूल को संभालता है, ताकि मुख्य छतरी बिना रुकावट खुले। टेस्ट में सामान्य से ज्यादा दबाव डाला गया, फिर भी यह अटल रहा।
भारत का पहला मानवयुक्त मिशन तीन यात्रियों को पृथ्वी कक्षा में तीन दिन रखेगा। यह उपलब्धि स्वदेशी तकनीक की ताकत दिखाती है, जहां भारत खुद ही एडवांस्ड पैराशूट बना रहा है।
राजनाथ सिंह ने इसे आत्मनिर्भरता की मिसाल कहा, जबकि डॉ. समीर कामत ने सभी टीमों को धन्यवाद दिया। आईएसआरओ और डीआरडीओ का संयुक्त प्रयास गगनयान को मजबूत कर रहा है।
विशेषज्ञ इसे मिशन के लिए निर्णायक कदम मानते हैं, जो अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्रों में भारत की बढ़ती क्षमता को रेखांकित करता है।