असम की राजनीति में गुरुवार को विधानसभा में हलचल मच गई। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सत्र के समापन पर रायजोर दल प्रमुख अखिल गोगोई को निशाने पर लिया। गोगोई की शिकायत थी कि सीएम ने उन्हें नजरअंदाज कर दिया, जिसके जवाब में सरमा ने उन्हें ‘परिपक्व व्यक्ति’ की तरह पेश आने की हिदायत दी।
सदन में गोगोई ने कहा कि उनकी मौजूदगी के बावजूद सरमा ने उनका जिक्र न करना हैरान करने वाला है। सरमा ने भाषण की प्रशंसा करते हुए संसदीय शिष्टाचार पर जोर दिया और व्यंग्यपूर्ण लहजे में सलाह दी।
चुनावी सफलताओं की शुभकामनाएं देते हुए सरमा ने गोगोई के संघर्षपूर्ण सफर की सराहना की, लेकिन ‘सोने के चम्मच’ वाले नेताओं से तुलना कर राजनीतिक बयानबाजी की। सदन में दोनों पक्षों से तीखे रिएक्शन आए।
सत्र के अंत में सभी सदस्यों को आभार व्यक्त करते हुए सरमा ने कहा कि आलोचना लोकतंत्र का आधार है। आने वाले सत्रों में सकारात्मक बहस की उम्मीद जताते हुए उन्होंने सकारात्मक नोट पर समापन किया। यह घटना असम विधानसभा की जीवंतता को उजागर करती है।