कर्नाटक में परिवहन कर्मचारियों की हड़ताल और बेंगलुरु के कचरा संकट ने राजनीतिक विवाद को भड़का दिया। भाजपा नेता आर. अशोक ने कांग्रेस सरकार को वित्तीय लापरवाही का दोषी ठहराया, दावा किया कि सत्ता ग्रहण के बाद विभाग खस्ताहाल हैं।
बेंगलुरु में पत्रकारों से अशोक ने कहा, “कांग्रेस राज में कोई विभाग धन से वंचित नहीं रहा।” सिद्धारमैया और रामलिंगा रेड्डी पर देरी का आरोप लगाया। 38 माह के बकाये के लिए आरटीसी हड़ताल पर उतरा। “सरकारी तिजोरी सूनी। मांगें अब तक निपटनी चाहिए थीं—यह कमजोरी का प्रमाण।”
धन होता तो चरणबद्ध या पूर्ण भुगतान संभव था। विरोध के बाद 26 माह का प्रस्ताव आया, जो नामंजूर। रेड्डी के पुराने बकाये के दावों पर अशोक ने 2018 और अपने मंत्रीकाल के आंकड़े दिखाने को कहा।
परिवहन संस्था घाटे में चली गई। कोविड को लम्बे समय तक जिम्मेदार न ठहराएं। ठेकेदार यूनियनें हड़ताल की धमकी दे रही हैं, शराब ठेकेदार आंदोलन करेंगे। “पिछले तीन वर्षों की भूलों का मूल्य चुकाना होगा।”
अशोक ने तत्काल समाधान की मांग की। राज्य में सेवा व्यवधान और असंतोष बढ़ रहा है, जो सियासी समीकरण बदल सकता है।