नई दिल्ली। विशाखापत्तनम में ‘मिलन-2026’ अभ्यास के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वैश्विक समुद्री चुनौतियों पर चिंता जताई। समुद्री लूट, आतंकवाद, गैरकानूनी मछली शिकार, तस्करी, साइबर कमजोरियां और सप्लाई चेन बाधाएं बड़ी समस्याएं हैं। जलवायु संकट से आपदाएं बढ़ रही हैं, जिसके लिए व्यापक राहत अभियान चाहिए।
कोई एक नौसेना इनका अकेले सामना नहीं कर सकती, उन्होंने कहा। सहयोग अनिवार्य है। 74 देशों के साथ यह सबसे समावेशी ‘मिलन’ बन गया, भारत की जिम्मेदार छवि को मजबूत करता हुआ। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सम्मानजनक साझेदारी से आगे बढ़ना होगा।
संयुक्त नौसैनिक अभ्यास सीमाओं को तोड़ते हैं, विश्वास जगाते हैं। ‘मिलन’ पेशेवर ज्ञान साझा करता है, संयुक्त क्षमता बढ़ाता है। क्षेत्रीय पहल से विश्वस्तरीय बन चुका यह प्लेटफॉर्म स्थायी संबंधों का प्रतीक है।
ड्रिल, बैठकें और सांस्कृतिक कार्यक्रम मित्रता के बंधन बांधते हैं। भारत नियम-आधारित समुद्री क्रम चाहता है। मजबूत वैश्विक संरचना से समुद्री रास्ते सुरक्षित, अपराध नियंत्रित होंगे। भारत पारस्परिक उन्नति के व्यापक विजन के साथ विश्व मित्र बनेगा।