मुंबई, 18 फरवरी। विजय माल्या मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। मंगलवार की सुनवाई में माल्या के वकीलों ने कहा कि ब्रिटिश अदालतों ने देश छोड़ने पर रोक लगाई है, इसलिए भारत लौटना संभव नहीं।
चीफ जस्टिस चंद्रशेखर और जस्टिस अनखड़ की डिवीजन बेंच के सामने फ्यूजिटिव ईओ घोषणा को पलटने की याचिकाएं आईं। अमित देसाई ने एससी केसों का हवाला देकर अनुपस्थिति में सुनवाई की गुजारिश की। प्रत्यर्पण के चलते बंधे होने का रोना रोया।
अदालत ने माल्या की नीयत पर उंगली उठाई। यूके आदेशों को चैलेंज न करने पर इसे टालमटोल बताया। तुषार मेहता को अफिडेविट पर रिप्लाई करने को कहा। मौखिक बयानों को हलफनामा बनाने का आदेश।
याचिकाएं 2019 से अटकी हैं, माल्या की तरफ से जल्दी का प्रयास न होने पर फटकार। तीन हफ्ते बाद 11 मार्च को डेट।
माल्या पर किंगफिशर के 9000 करोड़ से ज्यादा के डिफॉल्ट का बोझ। एसेट जब्ती और प्रत्यर्पण की जंग जारी। कोर्ट का यह कदम केस को तेजी देगा, सरकारी पक्ष की दलीलें तय करेंगी माल्या का भविष्य।