दंतेवाड़ा का प्रसिद्ध दंतेश्वरी मंदिर चमत्कारों की खान है। प्रांगणस्थ एक स्तंभ भक्तों को उनकी मनोकामना का संदेश देता है। यदि बाहें खंभे को लपेट सकें, तो मुराद पूरी। अन्यथा, प्रतीक्षा ही श्रेयस्कर। यह परंपरा आस्था को मजबूत बनाती है।
मां भगवती की प्रभावशाली मूर्ति छह भुजाओं में अस्त्र-शस्त्र लिए है। शक्तिपीठ के रूप में सती के दांत की कथा से जुड़ा यह स्थल बस्तर का अभिमान है। काकतीय नरेश अन्नमदेव की विजय मां की विशेष कृपा से हुई। नदी किनारे पदचिह्न दर्शन का केंद्र हैं।
चतुर्थ शताब्दी से अधिक पुरानी यह संरचना द्रविड़ शैली की है। सिले कपड़े पहनना वर्जित; धोती अनिवार्य। मंदिर प्रबंधन सुविधा देता है। उत्सवों में रौनक बढ़ जाती है।
भक्तों की अनगिनत गाथाएं हैं—निरोगी काया, संतान सुख, वैभव प्राप्ति। नवरात्र पर भारी भीड़। यह मंदिर साबित करता है कि विश्वास की शक्ति असीम है। दंतेश्वरी की जयंती पर भक्तजनों का तांता लगता है। आस्था के इस पवित्र धाम में हर मनोकामना संभव है।