भारतीय नौसेना का 2026 का सबसे बड़ा इवेंट विशाखापत्तनम में आयोजित होगा, जहां 1971 में पाकिस्तान की पीएनएस गाजी हमेशा के लिए डूब गई। आईएफआर और मिलन में पाक-चीन की अनुपस्थिति तो तय है, लेकिन आयोजन स्थल ही इस्लामाबाद के घाव कुरेदेगा।
गाजी का लक्ष्य था आईएनएस विक्रांत को डुबोना, मगर आईएनएस राजपूत ने उल्टा खेला। डाइविंग अभियान में आईएनएस निस्तार ने मलबा खोजा। अब आधुनिक स्वदेशी निस्तार उसी लोकेशन पर आईएफआर का हिस्सा बनेगा। नया विक्रांत भी इन्हीं जलों में होगा।
पहला स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल 2025 में नौसेना में शामिल हुआ। निस्तार श्रेणी में दूसरा निपुण निर्माणाधीन है। 2018 के सौदे पर हिंदुस्तान शिपयार्ड ने काम किया, महामारी से थोड़ी देरी। 80 प्रतिशत भारतीय सामग्री से बना 120 मीटर का यह जहाज 10,000 टन का है।
18 नॉट्स स्पीड वाला यह वेसल पनडुब्बी संकट में डीएसआरवी तैनात कर नाविकों को मुक्त करेगा। मुक्ति का प्रतीक ‘निस्तार’ गेम-चेंजर है। वैश्विक नौसेनाओं के बीच भारत की यह उपलब्धि गर्व का विषय बनेगी।
आईएफआर इतिहास और वर्तमान का संगम दिखाएगा, जहां पुरानी जीतें नई ताकत बनेंगी। नौसेना की प्रगति से क्षेत्रीय संतुलन बदलेगा।