शिक्षा मंत्रालय ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भारतीय शिक्षा प्रणाली में उतारने की मजबूत रूपरेखा प्रस्तुत की है। स्कूलों से लेकर विश्वविद्यालयों और तकनीकी पाठ्यक्रमों तक यह योजना शिक्षा, उद्योग एवं स्टार्टअप्स के संयुक्त मंथन से बनी है।
भारत मंडपम स्थित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ में आयोजित सत्र ने इसे गति दी। विशेषज्ञों वाले इस सत्र ‘मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन: पुशिंग द फ्रंटियर ऑफ एआई इन इंडिया’ में बड़े स्तर पर शिक्षा परिवर्तन पर विचार हुए। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान एवं राज्य मंत्री जयंत चौधरी उपस्थित रहे।
प्रधान ने पीएम मोदी की सोच को समिट का आधार बताया। भारत तेजी से एआई अपना रहा है, जो इसे ज्ञान महाशक्ति बनाएगा। विकसित भारत 2047 का लक्ष्य एआई से ही संभव है। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि एआई शिक्षा में सहायक बने और छात्र एआई सीखें तभी नवाचार संभव हैं।
चौधरी ने सत्र की चर्चाओं की सराहना की, जो प्राथमिक शिक्षा से ग्लोबल लीडरशिप तक फैलीं। मंत्रालय एवं स्किल इंडिया पवेलियन में स्वदेशी एआई समाधान दिखाए गए।
दस वर्षों की मेहनत से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, नीतिगत बदलाव एवं प्रशिक्षण आधार बने। आईआईटी मद्रास सेंटर हालिया उपलब्धि है। ‘भारत बोधन एआई कॉन्क्लेव’ के बाद अब अमल पर जोर। सभी पक्ष एकजुट होकर 2047 के विकसित भारत के लिए शिक्षा को सशक्त बना रहे हैं।