सुप्रीम कोर्ट ने 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट के दोषी अबू सलेम की समय से पहले बाहर आने की अपील को खारिज कर दिया। पुर्तगाल प्रत्यर्पण संधि का हवाला देकर दायर याचिका पर न्यायमूर्ति विक्रम नाथ व संदीप मेहता ने सोमवार को फैसला सुनाया।
वरिष्ठ अधिवक्ता ऋषि मल्होत्रा ने कोर्ट में पेश होकर याचिका वापस लेने का अनुरोध किया। मकसद बॉम्बे हाईकोर्ट में आश्रित केस की शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित करना था। बेंच ने सहमति जताई और याचिका को बिना किसी बाधा के खारिज घोषित किया।
अबू सलेम का कहना था कि 25 वर्ष की कैद पूरी हो गई है, जिसमें अच्छे व्यवहार की छूट जोड़कर। जेल अधिकारियों पर समय गणना में चूक का इल्जाम लगाया। हाईकोर्ट ने पिछले साल 7 जुलाई को प्रारंभिक जांच में पाया कि मियाद अभी बाकी है, राहत से इंकार किया।
टाडा अदालत ने सलेम को धमाकों के लिए सजायाफ्ता किया, जिसमें सैकड़ों जानें गईं। 2005 में प्रत्यर्पित होने पर संधि शर्तें तय हुई थीं। यह फैसला अंतरराष्ट्रीय करारों व भारतीय कानून के टकराव को रेखांकित करता है। हाईकोर्ट अब अगला पड़ाव बनेगा, जहां सलेम की राह चुनौतीपूर्ण दिख रही है। कानूनी जानकार लंबे संघर्ष की भविष्यवाणी कर रहे हैं।