16 फरवरी, नई दिल्ली। फाल्गुन अमावस्या यानी दर्श अमावस्या पर 2026 का पहला सूर्य ग्रहण लगेगा। वलयाकार प्रकार का यह ग्रहण ‘रिंग ऑफ फायर’ का शानदार दृश्य पैदा करेगा, पर भारतवासियों को वंचित रहना पड़ेगा क्योंकि दिखाई नहीं देगा।
दृश्यमानता दक्षिण गोलार्ध तक सीमित: अंटार्कटिका प्रधान, दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे आदि सहित दक्षिण अमेरिका। समय सारणी: आरंभ 3:26 अपराह्न, अधिकतम 5:42 संध्या, अंत 7:57। धनिष्ठा नक्षत्र, कुंभ राशि।
सूतक काल ग्रहण से 12 घंटे पहले, लेकिन अदृश्यता के कारण भारत में अमान्य। 17 को पूजा-पाठ, दैनिक कार्य निर्बाध। पंचांग: अमावस्या 5:30 अपराह्न तक, धनिष्ठा 9:16 रात्रि तक, मकर चंद्र। सूर्योदय-अस्त 6:58-6:13।
उत्तम काल: अभिजित दोपहर 12:13-58, विजय 2:28-3:13, गोधूलि संध्या 6:10-36, अमृत 10:39 पूर्वाह्न-12:17। परहेज: राहु 3:24-4:48, यमगण्ड 9:47-11:11, आडल 9:16-6:57। अंटार्कटिका में अग्निमाला, दक्षिणी महासागरों में आंशिक। भारत, एशिया, यूरोप आदि बहिष्कृत।