तमिलनाडु में श्रीलंकाई तमिल शरणार्थियों का मुद्दा गरमाया है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने पीएम नरेंद्र मोदी को डी.ओ. पत्र भेजकर 89,000 शरणार्थियों की नागरिकता या स्थायी वीजा देने की गुहार लगाई है। पत्र में इसे गहन मानवीय संकट करार दिया गया।
श्रीलंका के 1983 जातीय युद्ध से भागे ये लोग केंद्र की मंजूरी से तमिलनाडु आए। राज्य ने आश्रय, गुजारा, पढ़ाई व इलाज दिया। 30 साल से ज्यादा यहां रह चुके अधिकांश में 40 फीसदी देशी हैं।
कानूनी असमंजस बरकरार है। गैर-निवासी तमिल मंत्री वाली समिति ने सुझाया कि कई वर्ग- जन्म से पूर्व 1987 वाले, भारतीय परिवार के, विवाह से जुड़े, वंशज व दीर्घकालिक वीजा योग्य- स्थायी बन सकते हैं।
2003 संशोधन व 1986 आदेशों ने बाधा डाली, लेकिन 2025 छूट आदेश उजाला ला रहे। 2019 मद्रास कोर्ट फैसले से प्रेरित होकर स्टालिन ने मांगा- पुराने आदेश रद्द, दस्तावेज आधारित छूट, जिला प्रक्रिया व 2015 पूर्व रजिस्ट्रेशन को वैध मानना।
राज्य प्रायोजित इन परिवारों ने 40 वर्ष अनुशासित जीवन जिया। स्टालिन को उम्मीद है पीएम न्याय करेंगे, इनकी जिंदगी पटरी पर लाएंगे।