सीपीआई(एम) नेता वृंदा करात ने उदयपुर से केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। संसद में विपक्ष की आवाज कुचलने, अमेरिका के साथ ट्रेड समझौते की अफीम छिपाने और केरल चुनावी समीकरणों पर उन्होंने खुलकर बोला।
लोकसभा में विपक्षी नेता को बोलने न देने पर करात भड़कीं। भाजपा का इशारा साफ है- केवल उसके पसंदीदा मुद्दे ही चर्चा में। असल समस्याओं से मुंह मोड़ लिया गया है।
संसदीय कार्यवाही का बंटाधार हो रहा है। सदन की प्रतिष्ठा दांव पर है। कम सत्र दिवस, समितियों पर जोर जबरदस्ती, विधेयक जल्दबाजी में पास- ये सब लोकतंत्र को कमजोर कर रहे। हर बिल पर गहन बहस जरूरी, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा।
अमेरिका ट्रेड डील को उन्होंने एकपक्षीय बताया। संसद-जनता से जानकारी गायब। ट्रंप के बयान ही मुख्य स्रोत बने। प्रारंभिक भ्रम के बाद गोयल का संयुक्त स्टेटमेंट वाला बयान। सहमति बनी तो टैरिफ विवरण क्यों गुप्त?
जनता को असली बातचीत की शर्तों से वंचित रखना गलत है। पारदर्शिता जरूरी।
केरल में एलडीएफ की सरकार ने दो कार्यकाल में कल्याण कार्य किए। जनता प्रसन्न तो हैट्रिक संभव। नीति-आधारित वोटिंग होगी।
वृंदा करात की यह मुखरता राजनीतिक बहस को नई दिशा दे रही है।