पश्चिम बंगाल सरकार को भारत निर्वाचन आयोग ने कड़ा झटका दिया है। एसआईआर प्रक्रिया में फर्जी वोटर जोड़ने वाले चार अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने की अंतिम समय सीमा 17 फरवरी तय कर दी गई। आयोग ने राज्य की लापरवाही पर नाराजगी जाहिर की है।
सीईओ कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार को भेजे गए पत्र में साफ कहा गया कि बार-बार चेतावनी के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए अब डेडलाइन थोप दी गई।
दक्षिण 24 परगना जिले के बरुईपुर ईस्ट निर्वाचन क्षेत्र के ईआरओ देबोत्तम दत्ता चौधरी और एईआरओ तथागत मंडल के खिलाफ ठोस सबूत हैं। इसी तरह पूर्वी मिदनापुर के मोयना के ईआरओ बिप्लब सरकार व एईआरओ सुदीप्ता दास पर भी आरोप हैं।
गत वर्ष अगस्त से यह मामला लंबित है, जब ईसीआई ने सस्पेंशन व एफआईआर का आदेश दिया। राज्य की ओर से बहाने बनाए जाते रहे।
यह घटना बंगाल के चुनाव तंत्र की कमजोरियों को उजागर करती है। फर्जी वोटरों से लोकतंत्र पर खतरा मंडराता है। आयोग का हस्तक्षेप स्वागतयोग्य है, लेकिन सरकार की प्रतिक्रिया तय करेगी आगे का रास्ता।