चेन्नई से बड़ी राजनीतिक खबर: तमिलनाडु की पूर्व मंत्री नीलोफर कफील ने एआईएडीएमके छोड़ दी है और अब डीएमके का दामन थामने जा रही हैं। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की उपस्थिति में तिरुपत्तूर के डीएमके उत्तरी नेताओं के ट्रेनिंग कैंप में उनका स्वागत होगा, जो पार्टी के लिए भव्य आयोजन साबित होगा।
पलानीस्वामी को सौंपे इस्तीफे में नीलोफर ने अपनी लंबी पार्टी यात्रा का जायजा लिया, समर्थन के लिए आभार माना लेकिन निजी कारणों से संगठन से अलगाव की बात कही। तिरुपत्तूर के स्थानीय नेताओं को विशेष धन्यवाद दिया।
वानीयमबाड़ी से पूर्व विधायक और कैबिनेट मंत्री नीलोफर का 2021 में टिकट कटना विवादास्पद रहा। वीरमणि समर्थक को सीट मिलने से झगड़ा हुआ, निष्कासन हुआ, फिर बहाली लेकिन निष्क्रियता। अब डीएमके उनके अनुभव का फायदा उठाएगा।
राजनीतिक पंडितों के अनुसार, वेल्लोर के तिरुपत्तूर व वानीयमबाड़ी में उनका प्रभाव डीएमके को वोटों का लाभ देगा। यह कदम चुनावी दौड़ में सत्ताधारी दल को मजबूती प्रदान करेगा।
ऐसे दल-बदल से तमिलनाडु राजनीति में उथल-पुथल मच जाती है। एआईएडीएमके कमजोर पड़ेगा, डीएमके का कुनबा बढ़ेगा, जो आगामी चुनावों के परिणाम प्रभावित कर सकता है।