जमानत मामलों में अत्यधिक विलंब पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई है। कोर्ट ने इसे जेल बंद आरोपी के लिए यंत्रणा करार दिया जो उसके मूलभूत अधिकारों की अवहेलना है।
सीमापुरी हत्याकांड के आरोपी अमीर की याचिका पर न्यायमूर्ति गिरिश कथपलिया ने टिप्पणी की। 2021 की घटना में शिकायतकर्ता अनीस व मित्रों के साथ झगड़े में शोएब की चाकू हत्या हुई, सोहैल घायल। अमीर पर सहयोग का इल्जाम।
24 अक्टूबर 2021 से गिरफ्तार अमीर की याचिका निचली अदालत में 25 माह तक अटकी रही। वकील ने शीघ्र सुनवाई की मांग की थी। हाईकोर्ट में भी देरी। सोहैल ने कोर्ट में गवाही पूरी कर ली।
सरकार ने गंभीर अपराध का हवाला देकर विरोध किया, मगर स्वीकारा कि गवाहों की परीक्षा समाप्त। बेंच ने दोनों स्तरों पर देरी को चिंताजनक बताया।
अदालत ने कहा, कई फैसलों में स्पष्ट है कि जमानत लंबित न रहे। ऐसा होना मानसिक पीड़ा व अधिकार हनन है। हिरासत की लंबाई व मुकदमे की स्थिति से संतुष्ट होकर जमानत मंजूर की।
शर्तें: 10 हजार निजी जमानत व एक जमानतदार। ट्रायल कोर्ट की सहमति जरूरी। जेल को तुरंत सूचना का आदेश।
यह निर्णय जमानत प्रक्रिया को गति देने की मांग को मजबूत करता है, ताकि निर्दोष सिद्धि तक आजाद रहें।