चित्तौड़गढ़ दुर्ग की पौराणिक कहावतें आस्था को झकझोर देती हैं। इनमें गोमुख कुंड महादेव सबसे चमत्कारी है, जहां बाबा भोलेनाथ जल कुंड में विराजमान हैं और प्राकृतिक जलधारा उनका साल भर अभिषेक कर रही है। महाशिवरात्रि पर इसकी महिमा और बढ़ जाती है।
पूर्वी प्रवेश द्वार के पास बसा यह कुंड नक्काशीदार सुंदरता से भरपूर है। गाय मुंह जैसे कुंडों से पानी बहकर शिवलिंग को सींचता है। ऊंचे पहाड़ों से आने वाली धारा का उद्गम अज्ञात है, लेकिन इसे बेराच नदी से जोड़ा जाता है।
पानी साफ और पवित्र है, जिसमें छोटी मछलियां तैरती दिखती हैं। स्वयंभू शिवलिंग सभी पापों का नाशक माना जाता है। ऊर्जा केंद्र होने से नकारात्मकता दूर भगाता है।
दीवारों पर राजपूताना कला चमकती है—गौ और देवताओं की नाजुक प्रतिमाएं। कुंड का चट्टानी निर्माण रहस्यमयी है। रोज पूजा के साथ सावन-महाशिवरात्रि पर भीड़ उमड़ती है।
भक्त गान से परिपूर्ण होकर शिव विवाह का उत्सव करते हैं। गोमुख कुंड आध्यात्मिक यात्रा का सच्चा मुकाम है।