राजधानी में लाल किला मेट्रो के निकट हुए भयानक विस्फोट के मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को 45 दिनों का अतिरिक्त समय मुहैया कराया है। जटिल जांच के मद्देनजर 90 दिन मांगे गए थे, लेकिन कोर्ट ने समझदारी से आधा समय दिया।
नवंबर 10 को आत्मघाती हमलावर उमर उन नबी द्वारा विस्फोटक सामग्री से भरी हुंडई कार में की गई इस कार्रवाई से 15 जिंदगियां छिन गईं। एनआईए को शक है कि फरीदाबाद अल फलाह विश्वविद्यालय के चिकित्सक इस सनसनीखेज साजिश के केंद्रीय चरित्र हैं, जो जैश-ए-मोहम्मद जैसे गुटों से प्रेरित लगते हैं।
सातों आरोपी—शोएब समेत—की रिमांड 13 मार्च तक बढ़ी, जिसमें अधिकांश वीडियो लिंक से कोर्ट में हाजिर हुए। एजेंसी हथियार जुटाने, योजना रचना और सहयोगियों की पहचान पर फोकस कर रही है। फॉरेंसिक और डिजिटल सबूतों की पड़ताल में देरी न हो, इसके लिए यह विस्तार आवश्यक था।
डॉ. मुजम्मिल, डॉ. शाहीन और मुफ्ती इरफान जैसे नाम सामने आए हैं। अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन उभर रहे हैं, जिससे जांच तेज हो गई है। बहु-एजेंसी अभियान से आतंकी तंत्र को नेस्तनाबूद करने की उम्मीद है। दिल्ली जैसे महानगरों में सुरक्षा की चुनौतियां बढ़ा रहा यह केस पूर्ण न्याय की मांग करता है।