केंद्र की ‘वंदे मातरम’ अनिवार्य करने वाली नीति पर सियासतदारों ने तीखे बयानबाजी शुरू कर दी है। यूपी उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, ‘भारत में बसना है तो वंदे मातरम गाना पड़ेगा। विरोधी अपना रंग रो लेंगे।’
स्वतंत्रता आंदोलन के थीम सॉन्ग की 150वीं जयंती पर गृह मंत्रालय का नया आदेश विवादों में घिर गया। भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने नासिक यात्रा का हवाला देकर कहा कि यह मां भारती का गुणगान है।
दिल्ली के इमरान मसूद ने पलटवार किया, ‘हम सम्मान करेंगे, लेकिन आस्था नहीं बदलेंगे।’ संजय घाडी ने कानून पालन और धर्म सम्मान की बात की। मयंकभाई नायक ने सुप्रीम कोर्ट जाने वालों को आड़े हाथों लिया।
शिवसेना की शाइना एनसी बोलीं, ‘राष्ट्रीय गौरव का मुद्दा है, सीख लो।’ प्रतुल शाह देव ने जमीयत के विरोध को खारिज किया। विवेकानंद पांडे ने गीत को तटस्थ बताया। योगेश शुक्ला ने इसे राष्ट्र-विरोधी ठहराया। नंद किशोर गुर्जर का पाकिस्तान वाला बयान सुर्खियां बटोर रहा है। राजेश्वर सिंह ने देश को मां का दर्जा दिया।
यह मुद्दा राष्ट्रवाद बनाम धार्मिक स्वतंत्रता की जंग बन गया है। भाजपा और सहयोगी एकजुट दिख रहे हैं, तो विपक्ष संविधान का हवाला दे रहा। राजनीतिक तापमान बढ़ने से चुनावी रंग भी नजर आने लगा है।