कारगिल के अनुभवी राजनेता और नेशनल कॉन्फ्रेंस के पुराने हस्ताक्षर कमर अली अखून के निधन से जम्मू-कश्मीर में शोक की लहर दौड़ गई। पूर्व मंत्री अखून ने लद्दाख के पहाड़ी क्षेत्रों के हितों की रक्षा के लिए जीवन समर्पित कर दिया था। संगरा गांव के निवासी होने के बावजूद उन्होंने राज्य स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
संसद में सभी पार्टियों ने उनके कार्यों को याद किया। विशेष रूप से खाद्य विभाग में उनकी नीतियों ने दुर्गम इलाकों में राहत पहुंचाई। लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने और जनता की परेशानियों को सरकार तक ले जाने में वे अग्रणी रहे।
अखून ने शिक्षा, स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में सक्रिय योगदान दिया। ग्रामीण विकास के लिए प्रशासन से बार-बार संवाद किया, जिससे हजारों परिवारों को लाभ हुआ। उनकी सुलभता और समर्पण हमेशा याद रहेगा।
कुछ समय से बीमार चल रहे अखून का निधन चिकित्सा के दौरान हुआ। उनके घर पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। लोग उन्हें क्षेत्र का सच्चा योद्धा बता रहे हैं।
सज्जाद शाहीन ने सोशल मीडिया पर दुख जताया कि अखून के बिना जेकेएम का राजनीतिक माहौल सूना हो गया। परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दुआ मांगी। उनका जाना न केवल कारगिल बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए क्षति है।