14 फरवरी को शनिवार कृष्ण पक्ष त्रयोदशी के संयोग से शनि प्रदोष का पावन पर्व है। मासिक त्रयोदशी पर रखा जाने वाला यह व्रत शनिवार को शनि प्रदोष बनकर शिव-शनि दोनों की आराधना का सुअवसर देता है।
शाम 4:01 के बाद त्रयोदशी आरंभ होगी। प्रदोष काल में शिव-पार्वती की पूजा सभी कामनाएं पूरी करती है तथा जीवन के कष्ट मिटाती है। शनि के शिव भक्ति के कारण शनिवार का प्रदोष अत्यंत फलदायी है।
शनि दोष, साढ़ेसाती, ढैय्या वालों के लिए रामबाण। आर्थिक संकट, देरी, मुकदमे, मानसिक पीड़ा, बीमारी से मुक्ति दिलाता है। पुत्र प्राप्ति, पति की दीर्घायु, आरोग्य, धन-समृद्धि का वरदान देता है।
महाशिवरात्रि के निकट इस व्रत का महत्व चरम पर। शिवलिंग अभिषेक दूध आदि से करें। शिव को धतूरा, बेल, आक; गौरी को श्रृंगार समर्पित करें।
पंचांग विवरण: पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र 6:16 तक, उत्तराषाढ़ा बाद में। सिद्धि योग रात्रि 3:18 तक। धनु चंद्र। उदय 7, अस्त 6:10।
उत्तम समय: ब्रह्म मुहूर्त 5:18-6:09, अभिजित 12:13-12:58, अमृत 1:03-2:47, विजय 2:27-3:12। परहेज: राहु 9:48-11:12, यमगंड 1:59-3:23, गुलिक 7-8:24। विधि-पूर्वक व्रत से लाभ लें।