देश की राजधानी में विवादास्पद नोटिफिकेशन पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने तीव्र प्रतिक्रिया दी। सरकार ने ‘जन गण मन’ से पूर्व ‘वंदे मातरम’ के सभी छह छंदों को सरकारी कार्यों, शैक्षणिक संस्थानों और आधिकारिक कार्यक्रमों में बाध्यकारी घोषित किया, जिसे बोर्ड ने गैर-कानूनी और आस्था-हानिकारक ठहराया।
महासचिव मौलाना मोहम्मद फजलुर रहीम मुजद्दिदी के प्रेस नोट में स्पष्ट किया गया कि गीत के शेष छंदों में देवी-पूजा का वर्णन इस्लामी एकेश्वरवाद के विरुद्ध है। टैगोर की असहमति और संविधान सभा के निर्णय से पहले दो छंद ही राष्ट्रिय गीत बने। इस्लाम अल्लाह के सिवा किसी की पूजा अस्वीकार करता है।
धर्मनिरपेक्ष भारत में जबरन थोपना अस्वीकार्य, बोर्ड ने कहा। सुप्रीम कोर्ट ने भी ऐसे छंदों पर रोक लगाई थी। बंगाल चुनावों का राजनीतिक दांव माना जा रहा, लेकिन आस्था पर आघात बर्दाश्त नहीं। तत्काल वापसी न हुई तो न्यायालय जाएंगे।
आदेश के मुताबिक, पूर्ण 6 छंद (3:10 मिनट) राष्ट्रपति आयोजनों, पुरस्कार वितरण और स्कूलों में अनिवार्य, सम्मान स्वरूप खड़े होना जरूरी। यह घटना राष्ट्रीय एकता और विविधता के बीच तनाव को उजागर कर रही, जहां संवैधानिक अधिकारों की रक्षा प्रमुख चुनौती है।