दुनिया का अधिकांश व्यापार भारतीय समुद्री इलाके से होकर जाता है। इस रणनीतिक महत्व को देखते हुए नौसेना नए जहाजों और विमानों से लैस हो रही है। रक्षा अधिग्रहण परिषद ने छह और पी-8आई विमानों की खरीद को हरी झंडी दिखा दी, जो समुद्री अभियानों में नई ताकत जोड़ेगी।
राजनाथ सिंह की अगुवाई में हुई बैठक में एओएन को मंजूरी मिली। मंत्रालय ने बताया कि इससे लंबी दूरी पर पनडुब्बी शिकार, निगरानी और हमलों की क्षमता बढ़ेगी। अमेरिका से आने वाले ये विमान पहले से तैनात पी-8आई के साथ मिलकर बेड़ा मजबूत करेंगे।
नौसेना ने अब तक 12 पी-8आई हासिल किए हैं। 2009 का पहला सौदा आठ विमानों का, 2016 का चार का। 2019 की मंजूरी समयबद्ध न होने पर नया प्रस्ताव भेजा गया। 2021 में अमेरिकी मंजूरी और पीएम मोदी के दौरे पर सहमति बनी।
41,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ते हुए यह विमान समुद्र की गहराई में छिपे खतरे ढूंढता है। 8300 किलोमीटर की फ्लाइट रेंज और 11 हार्डपॉइंट्स से लैस, यह एंटी-शिप मिसाइलें, टॉरपीडो, चार्ज और माइंस छोड़ सकता है। बहुउद्देशीय रडार हर खतरे पर नजर रखता है।
यह फैसला समुद्री सीमाओं को मजबूत करेगा, आर्थिक हितों की रक्षा करेगा और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में भारत का स्थान बढ़ाएगा। नौसेना अब और सतर्क, सशक्त होगी।