हिंदू पंचांग जीवन का आधार है, जहां हर तिथि-नक्षत्र शुभ फल प्रदान करने को तैयार रहता है। 13 फरवरी को फाल्गुन कृष्ण पक्ष की विजया एकादशी है, जो भगवान विष्णु के भक्तों के लिए विशेष व्रत का दिन है। रामायण की कथा से जुड़ा यह पर्व लंका पर विजय से ठीक पहले श्रीराम द्वारा रखे गए व्रत की स्मृति दिलाता है।
पंचांग गणना से तिथि 12 फरवरी 12:22 अपराह्न से 13 फरवरी 2:25 अपराह्न तक। उदय तिथि से दिवस भर निर्धारित। व्रत के पुण्य से भक्तों को रोगमुक्ति, दुख निवारण, शत्रु नाश, न्यायालयीन जीत और इच्छापूर्ति का वरदान मिलता है।
चंद्र धनु में, मूल नक्षत्र 4:12 अपराह्न तक उसके बाद पूर्वाषाढ़ा। सूर्य उदय 7:01 प्र भा, अस्त 6:10 संध्या भा। अशुभ काल: राहु 11:12-12:35 अपराह्न, यमगण्ड 3:23-4:46 अपराह्न, गुलिक 8:25-9:48 प्र भा—इनसे बचें।
उत्तम मुहूर्त: ब्रह्म 5:18-6:10 प्र भा, अभिजित 12:13-12:58 अपराह्न, विजय 2:27-3:11 अपराह्न।
पारण द्वादशी तिथि पर। नारायण आराधना, व्रत कथा श्रवण तथा फल-जलाहार से व्रत सम्पन्न करें। यह एकादशी हर क्षेत्र में सफलता का द्वार खोलती है।