सतारा की विशेष अदालत ने मंगलवार को ईएसआईसी के अधिकारी स्वप्निल जाधव पर भ्रष्टाचार का ऐसा प्रहार किया कि उन्हें एक साल की कठोर कैद और 50,000 रुपये जुर्माने की सजा मिली। साक्ष्यों और गवाह बयानों ने अदालत को दोष सिद्ध करने में मदद की।
28 मार्च 2016 को सीबीआई के पास शिकायत दर्ज हुई। एक फर्म पर 10 से अधिक अनरजिस्टर्ड कर्मचारियों के लिए 3 लाख की पेनल्टी से बचने को जाधव ने 30,000 रुपये पहले मांगे, फिर 25,000 पर सहमत हुए।
ट्रैप ऑपरेशन में सीबीआई ने जाधव को बिचौलिए अभिजीत जाधव के साथ रिश्वत पकड़े जाते हुए गिरफ्तार किया। चार्जशीट जून 2016 में दाखिल हुई।
लंबी सुनवाई के बाद स्वप्निल दोषी करार दिए गए, जबकि अभिजीत को बरी किया गया। यह निर्णय न केवल अपराधी को सजा देता है, बल्कि सरकारी अमलों में पारदर्शिता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। भविष्य में ऐसे कृत्यों को रोकने के लिए सतर्कता जरूरी है।