मध्य प्रदेश में आदिवासी उत्थान की नई पहल के तहत मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उज्जैन में श्री महाकाल वन मेला का उद्घाटन किया। वन उत्पादों से आर्थिक स्वावलंबन सुनिश्चित करने पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि यह भोपाल मेले की तर्ज पर लगाया गया है। महाकाल-हरसिद्धि की नगरी में श्रीकृष्ण की कर्मभूमि पर यह आयोजन हो रहा है।
वन उत्पाद जागरूकता व आदिवासी सशक्तीकरण का माध्यम बनेंगे। वन स्वास्थ्य के पुराने साथी हैं। मेले से परंपरागत ज्ञान बाजार से जुड़ेगा। ‘वन प्राकृतिक औषधालय हैं, आरोग्य उत्सव का प्रतीक,’ उन्होंने कहा।
50+ वैद्य उपचार सुविधा दे रहे। महुआ उत्पाद लोकप्रिय हैं। सनातन में वन संस्कृति के आधार हैं। संजीवनी कथा वन विज्ञान दर्शाती है। आयुर्वेद के पितामह धन्वंतरि से चरक तक वन जड़ी बूटियों ने चमत्कार रचे।
च्यवनप्राश से अश्वगंधा तक वन उपहार हैं। नीम-अर्जुन आदि अमृत समान। कोरोना में आयुष ने दुनिया को रास्ता दिखाया। मोदीजी ने आयुष को वैश्विक सम्मान दिलाया।
मेले से आदिवासियों को बाजार मिला। 250 स्टॉल्स में अकाष्ठीय उत्पाद, ग्रामीण आजीविका, हर्बल बिजनेस, संरक्षण सब है। 76 वन धन केंद्र, 76 उद्यमी, 16 विभागीय, 16 भोजन। 50 ओपीडी स्टॉल पर 50 चिकित्सक व 100 वैद्य।
महुआ फूल, जामुन, बेल, चकोंडा आदि प्रमुख। दोना, रस्सी निर्माण जीवंत। यह सेतु आदिवासी परंपरा व आधुनिकता का है, जो मध्य प्रदेश को नई ऊंचाई देगा।