जम्मू-कश्मीर विधानसभा श्रीनगर में राजनीतिक तूफान आ गया। भाजपा विधायकों ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर असंसदीय भाषा इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए सदन की कार्यवाही ठप कर दी। वेल में धरना देकर उन्होंने बिना शर्त माफी की मांग की।
सबका起点 मंगलवार था जब बजट चर्चा के आखिरी चरण में सीएम के भाजपा पर शब्दों से विधायक भड़क उठे। ‘गैर-संसदीय’ करार देते हुए वे खड़े हो गए। उमर वापस लेने को तैयार थे, मगर बार-बार व्यवधान ने रोका।
अगले दिन भाजपा ने दोबारा हमला बोला। शाम लाल शर्मा ने शुरुआत में शोर मचाया, फिर वॉकआउट। प्रश्नकाल समाप्ति पर लौटे तो सीएम जा चुके थे। नारेबाजी के बीच वे लाइनबद्ध होकर विरोध जताते रहे।
स्पीकर राथर ने व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की। वॉकआउट मुद्दा बंद, विरोध दर्ज नहीं होगा, ऐसा फैसला सुनाया। मंगलवार को दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताते सीएम को बोलने का अवसर देने की बात कही।
शर्मा ने ऐतिहासिक घटना बताते सदन नेता से शब्द वापसी पूछी। ‘उनकी अंतरात्मा तय करे,’ उन्होंने कहा। सकीना इटू ने आरोप लगाया कि भाजपा ने डिप्टी सीएम पर असंसदीय बातें कहीं और झूठ बोला। चौधरी ने दोनों पक्षों के शब्द हटाने का प्रस्ताव रखा।
सुनील शर्मा ने ठुकराया और नारों के साथ वॉकआउट लीड किया। भाजपा अड़ी है- माफीまで कोई काम नहीं। यह टकराव जेकेएस विधानसभा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, जहां छोटी चिंगारियां बड़े विवाद बन जाती हैं। बजट सत्र के लिए चुनौतीपूर्ण समय आगे है।