उत्तर प्रदेश विधानसभा में पेश बजट ने विपक्ष को भड़का दिया। सपा नेता शिवपाल सिंह यादव ने एक्स पर पोस्ट कर इसे ‘कागजी बजट’ कहा। ‘मुबारक हो, एक बार फिर सपनों का अमृत मिला,’ तंज कसते हुए सड़कों के गड्ढे, बेरोजगारी और खाली फाइलों का जिक्र किया। विकास सिर्फ होर्डिंग्स तक सीमित।
आंकड़ों की बाजीगरी, गरीबी का हाहाकार। जुमलों से खेती, नौकरी पर ‘आत्मनिर्भर’ का लेक्चर। महंगाई बेलगाम, किसान खुश? यह इवेंट है, बजट नहीं।
कांग्रेस की आराधना मिश्रा मोना ने बजट को निराशाजनक ठहराया। 9 लाख 12 हजार करोड़ में नई स्कीमों को 43 हजार—नगण्य। किसान उपेक्षित, खाद संकट, आय घटी। वृद्धि दर नीचे, वादे झूठे।
कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स, इंस्ट्रक्टरों का भुगतान नदारद। पिछड़े इलाकों को विशेष पैकेज नहीं। घाटा बढ़ेगा, टैक्स बोझ जनता पर। युवाओं-शिक्षकों से धोखा। ‘विदाई बजट’ है यह, 2027 में हिसाब बराबर होगा।
लखनऊ में बहस छिड़ी। जन असंतोष उफान पर, चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।