राजधानी में बुधवार को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी पर विशेषाधिकार हनन का निशाना साधा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में लोकसभा बजट चर्चा के दौरान राहुल के ‘जंगली आरोपों’ को निशाने पर लेते हुए उन्होंने स्पीकर को नोटिस देने का वादा किया। सदन को भ्रमित करने वाले बयान नियम-विरुद्ध हैं, उनका कहना था।
संसद के दोनों सदनों में आरोप लगाने के लिए पूर्व सूचना और सबूत अनिवार्य। राहुल ने न तो नोटिस दिया, न प्रमाण पेश किए। बजट पर बहस में उपयोगी बातें शून्य, सिर्फ निराधार बातें। रिजिजू ने उन्हें वित्त मंत्री के शाम पांच बजे के जवाब के लिए रुकने की सलाह दी थी।
अर्थव्यवस्था पर राहुल के दावों का खंडन करते हुए रिजिजू ने मनमोहन सिंह के 2014 वाले बयान का जिक्र किया। पीआईबी रिलीज में 2030 तक तीसरी अर्थव्यवस्था का लक्ष्य था। पीएम मोदी ने इसे आगे बढ़ाया- अब चौथा स्थान, शीघ्र तीसरा। 2014 पूर्व 11वें क्रम पर कमजोर मानी जाती अर्थव्यवस्था अब मजबूत।
‘भारत को बेच दिया’ आरोप पर तीखा प्रहार- ‘देश अजेय, कोई व्यापार नहीं।’ राहुल ने गैर-सांसदों और पुरी का नाम लिया, माफी मांगने के बाद फिर दोहराया। भाजपा नोटिस के जरिए प्रमाण मांगेगी, गलत बातें रिकॉर्ड से हटेंगी।
गंभीर इल्जाम के बाद भागना ठीक नहीं, मंत्री का पक्ष सुनें। बुधवार को Sitharaman के जवाब में उपस्थिति जरूरी। रिजिजू का बयान विपक्ष-सरकार के बीच गहरी खाई दर्शाता है।